STORYMIRROR

Anamika Sachdeva

Abstract

3  

Anamika Sachdeva

Abstract

पैसा ही पैसा

पैसा ही पैसा

1 min
273

पैसा पैसा पैसा चारों तरफ

ये शोर मचा है कैसा


पैसा ही सबकी चाहत है

पैसा ही सबकी जान है


पैसे से ही सबकी पहचान है

पैसा ही भगवान है


इस पैसे ने ईमान बिकवाया,

भगवान बिकवाया


इस पैसे ने इंसान को शैतान बनाया

वाह यह पैसा वाह यह पैसा


ये शोर मचा है कैसा

अब तो पैसा ही बन गया बीमारी


हाय पैसा हाय पैसा कहती दुनिया सारी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract