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Anamika Sachdeva

Abstract

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Anamika Sachdeva

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पैसा ही पैसा

पैसा ही पैसा

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पैसा पैसा पैसा चारों तरफ

ये शोर मचा है कैसा


पैसा ही सबकी चाहत है

पैसा ही सबकी जान है


पैसे से ही सबकी पहचान है

पैसा ही भगवान है


इस पैसे ने ईमान बिकवाया,

भगवान बिकवाया


इस पैसे ने इंसान को शैतान बनाया

वाह यह पैसा वाह यह पैसा


ये शोर मचा है कैसा

अब तो पैसा ही बन गया बीमारी


हाय पैसा हाय पैसा कहती दुनिया सारी।


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