Shailaja Bhattad
Inspirational
हालचाल पूछकर, वक़्त जाया ना करो;
दिल से कद्र करो, इरादों से पाक रहो;
खुद पारस बन, सबको पारस कर दो।
जयश्री राम
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
राम- भरत
श्री राम- भरत
हिन्दी नारे
श्रीराम
होली है
मेरी यादों के आँगन में हजारों आँधियाँ बहतीं। मेरी यादों के आँगन में हजारों आँधियाँ बहतीं।
धन्य धरा अपने भारत की, वसी जहाँ संगम नगरी। धन्य धरा अपने भारत की, वसी जहाँ संगम नगरी।
मैं खुद से प्यार करने लगी हूं बातें हजार करने लगी हूं । मैं खुद से प्यार करने लगी हूं बातें हजार करने लगी हूं ।
जहां प्रेम की ज्योत जलती है, वहां बेवफाई का डर रहता नहीं। जहां प्रेम की ज्योत जलती है, वहां बेवफाई का डर रहता नहीं।
नज़दीकियाँ इतनी मत बढ़ाओ कि पछताना पड़े। नज़दीकियाँ इतनी मत बढ़ाओ कि पछताना पड़े।
महाराणा री जद हुई चहुं ओर जय जयकार महाराणा री जद हुई चहुं ओर जय जयकार
बस प्रार्थना इतनी सी है प्रार्थना कामना ना बन जाए। बस प्रार्थना इतनी सी है प्रार्थना कामना ना बन जाए।
नदिया अरु जीवों का नाता जग में अति प्राचीन । नदियों के तट पर ही विकसित हुए हैं नगर नवीन। नदिया अरु जीवों का नाता जग में अति प्राचीन । नदियों के तट पर ही विकसित हुए ह...
ये निस्संदेह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, सुवास कुमार वर्मा जी ! ये निस्संदेह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, सुवास कुमार वर्मा जी !
जब प्रीत रहे मन- ऑंगन तो, मन-मोर कभी उद्भ्रांत न होगा जब प्रीत रहे मन- ऑंगन तो, मन-मोर कभी उद्भ्रांत न होगा
जिनकी छत छाया में रहकर तू इतना बड़ा हुआ है।। जिनकी छत छाया में रहकर तू इतना बड़ा हुआ है।।
जब बन जाती है व्यथा भार जन जीवन में। कुछ भी तो सूझता नहीं। जब बन जाती है व्यथा भार जन जीवन में। कुछ भी तो सूझता नहीं।
लक्ष्मी की सूरत ममता की मूरत लाखों में एक हमार भौजी। लक्ष्मी की सूरत ममता की मूरत लाखों में एक हमार भौजी।
हमारी सनातन संस्कृति और हमारी सभ्यता क्या कहती है एक दूसरे से सुनिए ज़रा। हमारी सनातन संस्कृति और हमारी सभ्यता क्या कहती है एक दूसरे से सुनिए ज़रा।
हिन्दूजा सूरज है,महाराणा प्रताप पूरी दुनिया गा रही है,उनका प्रताप। हिन्दूजा सूरज है,महाराणा प्रताप पूरी दुनिया गा रही है,उनका प्रताप।
हम सब कर्जदार हैं प्रकृति के। हम सब कर्जदार हैं प्रकृति के।
अलौकिक तेज ओज गौरव के,अथाह प्रशांत सिंधु थे तुम। अलौकिक तेज ओज गौरव के,अथाह प्रशांत सिंधु थे तुम।
सदियों पहले किताबें हमारी ज़िन्दगी में आयी, वेद,पुराण,काव्य,ग्रन्थ,उपनिषदों की वाहक बनी। सदियों पहले किताबें हमारी ज़िन्दगी में आयी, वेद,पुराण,काव्य,ग्रन्थ,उपनिषदों की...
नमन तुम्हें हे कृष्ण मुरारी क्यों लेते हो परीक्षा हमारी। नमन तुम्हें हे कृष्ण मुरारी क्यों लेते हो परीक्षा हमारी।
अब क्या अन्तर कि कौन कहाँ किस मुकाम पर है। अब क्या अन्तर कि कौन कहाँ किस मुकाम पर है।