नया साल
नया साल
ऐ उदित आदित्य बता,है क्या नया नई साल में ।
लालसा ही लालसा, रंग तुम्हारे लाल में।।
हर सुबह आ तुम बताते ,अब उठो-अब उठो।
कर्म पथ बाहें पसारे, कोई रोके ना रुको।।
जिंदगी के गीत गा, ऐ मनुज हर हाल में ।
ऐ उदित आदित्य बता, है क्या नया नई साल में ।।
जब बिगुल बजने लगे कामना के प्रति सुबह।
सोच लेना देंगे क्या, जो हो देने की वजह ।।
रंग भरता नित प्रभात, घन तिमिर के जाल में ।
देख लेना तुम कभी उसे सप्तरंग जमाल में।।।
ऐ उदित आदित्य बता, है क्या नया नई साल में
आओ कर दो बालिकाओ शंख गर्जन विश्व में।
अब तलक देखा है तुमको, सबने देते अर्ध्य में।।
तुम बढ़ो अब ,वर्जनाओं के ब्यूहों जाल में।
रोक पाएं न कदम, सिंधु सुनामी चाल में।।
ऐ उदित आदित्य बता, है क्या नया नई साल में।
मन रही छब्बीस जनवरी, गणतंत्र घोषित देश में।
बन गया है संविधान अब , भारतीय संदेश में।।
रहते हैं यहाँ देशवासी,सब अपने -अपने वेश में।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ही परिवेश में।।
मेरे भारत आ गया सन् दो हजार तेईस चाल में।।
ऐ उदित आदित्य बता ,है क्या नया नई साल में...
