नववर्ष का मौन संदेश
नववर्ष का मौन संदेश
नववर्ष का मौन संदेश *************** लो जी! एक और वर्ष बीत गया फिर एक नया वर्ष आ गया, हम फिर पुराने वर्ष को लापरवाही से विदा कर नये वर्ष का तरह- तरह से स्वागत करेंगे एक दूसरे को बधाइयाँ शुभकामनाएं देंगे और फिर अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ेंगे। हालांकि इसमें कुछ नया तो है नहीं, हम तो हर वर्ष ऐसा ही करते हैं क्योंकि यही हमारी आदत है जिसकी जड़ें काफी गहरी हैं। गतवर्षौं के आगमन के समय भी हम ऐसा ही कर चुके हैं और आने वाले के साथ ही नहीं आगे आने वाले और वर्षों के साथ भी हम ऐसा ही करेंगे। पहले भी आने वाले वर्षों के स्वागत के साथ ही हम सबने कुछ नूतन संकल्प किए थे, कुछ खासम-खास योजनाएं बनाई थी, पर हमने क्या खोया-क्या पाया? कितना हँसे-कितना रोये, क्यों हँसे-क्यों रोये? कितना ईमानदार-कितना बेईमान रहे? कितना लूटे- कितना लुटाया? क्या कितना गलत या सही किया? जो हुआ वो क्यों और कैसे हुआ ? हमारी भूमिका कितनी सार्थक - निरर्थक रही? हम सच की राह पर चले या ग़लत राह पर दौड़ते रहे, इस पर कभी हम चिंतन ही नहीं करते बस! वही पुरानी लीक पर दौड़ते जा रहे हैं जो पाना है, ढंग से पा नहीं रहे हैं जो खोना है, उसे कसकर जकड़े हुए हैं बस! नये वर्ष के आगमन पर बावले हुए जा रहे हैं। आखिर क्या नया है नये वर्ष में, जो पुराने में नहीं था, सिर्फ कैलेंडर और वर्ष की गिनती ही तो बदली है, मौसम की चाल तो नहीं बदली सूर्योदय और सूर्यास्त भी अपने ढर्रे नहीं छोड़ेंगे दिन-रात भी पहले की तरह चौबीस घंटे के ही होंगे, अँधेरे-उजाले का क्रम भी नहीं टूटने वाला। वास्तव में नये वर्ष में बदलना तो हमें है जिसके लिए हम तैयार नहीं हैं, क्योंकि हम तो कैलेंडर सरीखे लटके हुए ही खुश हैं जीवन का एक और वर्ष बीत गया बस इतने भर से ही खुश होकर उछल कूद रहे हैं, जैसे पानी में लाठी मार रहे हैं। अच्छा है नये वर्ष का स्वागत, अभिनंदन कीजिए पर अपने शेष जीवन के लिए भी अपनी श्री कार्य योजना भी तो तैयार कीजिए जो बीत गया अच्छा या बुरा उसमें मत उलझिए और आगे बढ़िए। नया वर्ष भी आने के साथ ही पुराना होने लगता है, जैसे जीव जन्म के साथ मृत्यु की ओर बढ़ने लगता है, न समय पीछे जाता है, न हमारी उम्र बढ़ती है बस क्रमानुसार वर्ष की गिनती बढ़ती और हमारे जीवन का समय घटता है। जिसे हम-आप बदल भी नहीं सकते ठीक वैसे ही नया वर्ष स्वागत की लालसा में नहीं अपने नियत समय से ही आया है और जायेगा भी। उसके मौन संदेश को समझिए जीवन को सफलता की ओर ले चलिए, इसके लिए जो भी चिंतन मनन, प्रयास करना है, बाखुशी ईमानदारी से करिए, नया वर्ष तब ही आपको मान-सम्मान देगा जाता हुआ वर्ष आभार धन्यवाद करेगा, नये वर्ष का स्वागत भी, आपके किसी काम नहीं आयेगा ठेंगा दिखाते हुए मुस्कराएगा, आयेगा और फिर विदा हो जायेगा। सुधीर श्रीवास्तव
