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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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यमराज का होली हुड़दंग

यमराज का होली हुड़दंग

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यमराज का होली हुड़दंग  ******* रंग भरी बाल्टी लिए मित्र यमराज  होली की बधाई, शुभकामना देने पधारे, औपचारिक शुभकामनाओं के साथ बोले - प्रभु! यहीं पर रंग रोगन लगाऊँ या आप स्वयं चलेंगे द्वारे। मैंने कहा - यमराज प्यारे,  बस हम एकमात्र तुम्हीं से हम हारे, इसलिए अभी चल रहे हैं आपके सहारे। तब तक श्रीमती जी कमरे में आ गईं और सख्त लहजे में बोलीं -कोई कहीं नहीं जायेगा मुझे सब पता है तुम दोनों का, द्वारे जाना तो बस बहाना है, होली की आड़ में पीना और पिलाना है, यमलोक तक मेरी नाक कटवाना है। फिर यमराज से सीधे मुखातिब हो कहने लगीं सुनो प्यारे! होली मनाओ, रंग अबीर गुलाल लगाओ आपस में गुत्थमगुत्था हो जाओ जमकर हाथापाई करो, बस घर से बाहर नहीं जाओ, और यदि चले भी गए तो  लौटकर यहाँ आने के बजाय सीधे यमलोक ही जाओ गुझिया, कचरी, पापड़, मिठाई, पकवान भूल ही जाओ। यमराज मासूमियत से बोला -  जी भाभी जी! बहुत हो गया  पहले होली का रंग लगाओ,  फिर कुछ हमको खिलाओ, पिलाओ,  और थोड़ी देर के लिए इसे भूल जाओ, हमारी इतनी हिम्मत नहीं जो आपकी बात काट सकें  और भूखे पेट जाने की जहमत उठा सकें। इतना कहकर उसने श्रीमती जी के गालों पर रंग लगाया  माथे पर अबीर गुलाल सजाया  और साष्टांग उनके पैरों में गिर गया। श्रीमती जी ने पहले मेरी ओर देखा  फिर उसे उठाया, गले लगाया, पीठ थपथपाया आशीर्वाद का पूरा गोदाम सौंप सम्मान से बैठाया  पूड़ी पकवान गुझिया पापड़ अपने हाथों से खिलाया। बंदा बड़ा समझदार निकला -  मेरी ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहने लगा होली का त्योहार है, भाभी जी की सरकार है  मान लें अब बस! तू ही बेकार है। इतना सुन मुझे गुस्सा आ गया -  वाह हहहहहहह बेटा! तो तू भी दल बदलू हो गया, यमराज हँसते हुए बोला -  आपकी कसम प्रभू! ऐसा बिल्कुल नहीं है  आप इसे कुछ भी कहें - मगर ये सब स्वार्थ की माया है, तभी तो तेरा यार आज यहाँ आ पाया, तुझसे यारी का यह प्यारा इनाम पाया। इससे ज्यादा कुछ कहूँ भी तो क्या? कि यमराज धरती पर तुझसे होली खेलने आया है? पर दारू नहीं पी, न ही पिला पाया है  सिर्फ गुझिया पापड़ पकवान से काम चलाया है। इतना कहकर यमराज फ़ुर्र हो गया  अपनी रंग भरी बाल्टी में दो बोतल चुपचाप छोड़ गया, यार से ग़ज़ब की यारी प्यार से निभा गया, सच कहूँ! तो बंदा कमाल कर गया होली हुड़दंग बड़े सलीके से कर गया  अपने यार पर इतना तो अहसान कर गया। सुधीर श्रीवास्तव  


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