नसीहत
नसीहत
सब कुछ नवाज देता है, हाथ उठा कर देखो,
वो बड़ा मेहरबान है, दामन फैला कर देखो।।
क्या क्या दिया है उसने दूसरों को, ना देख,
क्या दिया है, कभी खुद को आईना बना कर देखो।।
ख़्वाहिशें अपनी भूल जाएगा तू खुद बा खुद,
बस्तियों में गरीबों की, कभी तो जाकर देखो।।
और यूं इतरा के चलना अच्छा नहीं लगेगा,
किसी अपाहिज को कंधा थमा कर देखो।।
बोलना फजूल बातों का, छोड़ देगा तू,
क्या अरमान है, गूंगो के दिल समझ कर देखो।।
और अपनी मर्ज़ी से भीख नहीं मांगते ये ग़रीब,
भूख किसे कहते है, कभी भूखा रह कर देखो।।
और सपनों के लिए अपनों को छोड़ दिया,
सुकून किसे कहते है साथ रह कर देखो।।
हर एक ख़्वाब पूरा पूरा सा लगने लगेगा तुम्हें,
कुछ दिन बिना घर के लोगो में रह कर देखो।।
