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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Children

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Children

"नन्हा बालक "

"नन्हा बालक "

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नमन StoryMirror

प्रस्तुति : दैनिक रचना 

विधा : कविता 

घोषणा : स्वरचित मौलिक और अप्रकाशित 

संदर्भ :सुनहरे आँगन में गेंदे के फूल, दीयों की रोशनी और आपके सामने दौड़ता-हँसता वही चंचल नन्हा बालक!

दिनांक :29 सितंबर 2026 

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"नन्हा बालक" 

डॉ॰ लक्ष्मण झा 'परिमल '

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मिलते हो कभी कुछ लम्हों में,

न जाने कहाँ गुम हो जाते हो! 

देते हो सदा सुख पलकों को,

फिर क्षण में ओझल हो जाते हो!!

सूनेपन में,

कुछ आहट से,

चौंक उठता हूँ,

बिखरी हुई,

अनुभूति को, 

क्षण में पिरोता हूँ!!

चंचलता, चपलता, मुस्कुराता चेहरा,

लेकर तुम मेरे सामने आ जाते हो!

देते हो सदा सुख पलकों को,

फिर क्षण में ओझल हो जाते हो!!

मिलते हो.............................

परिवर्तन से,

यह जग,

सारा चलता है,

पर तुम्हें देखने को,

मन सदा ही,

'लालायित रहता है

आश्चर्यचकित अचंभित परिवेशों में, 

झट से तुम प्रकट हो जाते हो! 

देते हो सदा सुख पलकों को,

फिर क्षण में ओझल हो जाते हो!!

मिलते हो कभी कुछ लम्हों में,

न जाने कहाँ गुम हो जाते हो!

देते हो सदा सुख पलकों को,

फिर क्षण में ओझल हो जाते हो!!

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डॉ. लक्ष्मण झा ‘परिमल’

दुमका झारखंड


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