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हरीश कंडवाल "मनखी "

Abstract Inspirational Children

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हरीश कंडवाल "मनखी "

Abstract Inspirational Children

मुझे जन्म लेने दो

मुझे जन्म लेने दो

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मैं अभी अनजान और बेनाम हूँ आने वाले आपके भविष्य की शान हूँ

मुझे नहीं मालूम मेरा भविष्य क्या होगाए

मुझे नहीं मालूम मेरा अंजाम क्या होगा।


अभी तक मैंने दुनिया में आने के लिए पहला कदम रखा है

अभी तो मैने जीवन की परिभाषा तक नहीं समझी है

फिर मुझे धरा में आने से क्यो रोकते हो

मैने तो कोई गुनाह भी नहीं किया है

मुझे गर्भ में ही मारने के लिए क्यों सोचते हो।


माँ मै एक लडका हूँ या लडकीए

अभी से तुम इतना भेद क्यो करते होए

पापा मैने अभी तो पूर्ण जीव का रूप भी नहीं लिया है

आप अभी से क्यों मेरा नामो निशान मिटाने की सोचते हो।


मेरे अल्पविकसित अंग अभी तो कोमल है

जो मम्मी पापा के बाहों में आने को व्याकुल हैं

मुझे तो अभी आपके आंगन का फूल बनना है

मुझे तो अभी आपके घर का खिलौना बनना है।

अभी तो मुझे आपके संग में जीना है।


अभी तो मेरा रिश्ता भी नहीं जुडा है आपसे ए

लेकिन मैने आपको माँ बाप अभी से मान लिया है

तुम मुझे जनम दोगे प्यार से ऐसा मैने मान लिया है

करबद्ध आरजू है आपसे यही मेरीए

मुझे गर्भ में मत मारने की तुम सोचनाए

मुझे भी जीवन जीने का सुनहरा मौका अवश्य देना।


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