STORYMIRROR

Akanksha Verma

Abstract

2  

Akanksha Verma

Abstract

नज़रिया

नज़रिया

1 min
86

माना बुरी हूं,

पर इतनी नहीं है जितना लोग भी समझते है।

भगवान ही हर  इंसान को रचते हैं,

फिर इंसान ने ऐसी कौन सी बुराई  देख ली

जो हरदम मुझको ही जज करते हैं।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Akanksha Verma

Similar hindi poem from Abstract