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Akanksha Verma

Abstract

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Akanksha Verma

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नज़रिया

नज़रिया

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माना बुरी हूं,

पर इतनी नहीं है जितना लोग भी समझते है।

भगवान ही हर  इंसान को रचते हैं,

फिर इंसान ने ऐसी कौन सी बुराई  देख ली

जो हरदम मुझको ही जज करते हैं।।


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