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Kaushik Dave

Abstract

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Kaushik Dave

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" नज़र "

" नज़र "

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तेरी मुहब्बत में हम घायल हुए,

ना मुलाकात का दौर,

बस एक नजर,

हम तुम्हारे हो गये।


बस नजरों का दौर चलता रहा,

वो मुझे देखती रही,

और आंखों से ओझल हो गई।


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