निर्झर
निर्झर
ओ माँ तू निरंतर निर्झर सी बहती है,
समेट लेती अपनी बाहों में,
हर दुःख -दर्द हमारा हर लेती है,
हर दुःख सहती उफ़ न करती,
निर्झर निरंतर बहती है,
बिन कहे करती हमसे इतना प्यार,
तेरे बिना अधूरा है यह संसार,
ओ माँ तू निरंतर निर्झर सी बहती हैI
झरनों की शीतलता का अहसास देती,
अपनी थकान भूलकर,
बच्चों की थकान मिटती है ,
गर्मी ,सर्दी सब खुद सह लेती ,
आँचल की छाव हमें देती है,
ओ माँ तू निरंतर निर्झर सी बहती हैI
हृदय तेरा विशाल ,
जिसमें निर्झर सा बहता प्यार,
कल-कल करते झरनों सा बहता स्वरुप,
तेरी आँखों से छलकता तेरा निर्मल प्यार है ,
स्नेह निर्झर झरता मृदु तेरी लोरी है ,
ओ माँ तू निरंतर निर्झर सी बहती हैI
संवेदना ,भावना ,तुझमें,
फूलों की खुशबू का वास है ,
जाने कितने ही आँचल रोज भिगोती,
स्वयं के सपने भूलकर,
अपने बच्चों के सपने संजोती है,
ओ माँ तू निरंतर निर्झर सी बहती हैI
सोनी गुप्ताकालका जीनई दिल्ली-19
