निकृष्टता का विधवा विलाप
निकृष्टता का विधवा विलाप
निकृष्टता का विधवा विलाप जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की आड़ में क्या कुछ नहीं हो रहा है, सत्ता की राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं संवैधानिक पदों पर बैठे कुछ बेशर्म नीट परीक्षा की आड़ में लोकतंत्र का माखौल उड़ा रहे हैं, देश में अस्थिरता फैलाने का कुचक्र रच रहे हैं प्रोटोकॉल का खुला उलंघन कर रहे हैं, सड़क छाप गुण्डों जैसा आचरण कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन में हिंसा, सुरक्षा बलों पर हमला देश विरोधी नारों, संसद उखाड़ फेंकने नेपाल, बांग्लादेश की तरह तख्तापलट करने को खीस निपोरे मौन समर्थन दे रहे हैं। अपराधी तत्वों को छात्र और बेकसूर बता रहे हैं, संसद में चर्चा से दुम दबाकर भाग रहे हैं सड़कों पर घूम-घूम कर सिर्फ विधवा विलाप कर रहे हैं, दोहरा मापदंड अपनाने का नया इतिहास लिख रहे हैं। देश की प्रगति से शरमा रहें, सिर्फ कुर्सी के लिए मरे जा रहे हैं, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं बच्चों के हाथों से पत्थर, हथियार थमा कर उकसा रहे हैं, आपराधिक कृत्यों करने की दिशा में ढकेल रहे हैं। अपने पुरखों के नक्शे कदम पर चल रहे हैं झूठ पर झूठ बोलने का नया रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं, समस्या सुलझाने में योगदान के बजाय आग में घी डालकर धधकाने सतत् प्रयास रहे हैं अपनी बेशर्मी, बेहयाई और कुचेष्टाओं को युवाओं के कंधों के सहारे खाद पानी देने की कोशिश हद से नीचे गिरकर कर रहे हैं, अपनी सबसे निकृष्ट मानसिकता का उदाहरण सगर्व पेश कर रहे हैं। सुधीर श्रीवास्तव
