STORYMIRROR

सोनी गुप्ता

Abstract Classics Inspirational

4  

सोनी गुप्ता

Abstract Classics Inspirational

नारी

नारी

1 min
400

एक सुदृढ़ समाज बनाती है नारी 

वर्तमान को खुबसूरत दिखाती है नारी 

इसलिए अज्ञानता के अन्धकार से दूर कर 

उन्हें अग्रसर कर शिक्षा का प्रकाश जगाना है 

ज्ञान का दीप जलाकर हर नारी को साक्षर बनाना है 

 

अब ना सहेगी अत्याचार नारी 

समाज में अपनी अलग पहचान बनाएगी 

हर अवसर में अपना सुअवसर खोज लेगी नारी 

स्वयं ही ये सक्षम और शक्तिशाली समाज बनाएगी 

अपनी राह खुद चुनेगी और आत्मनिर्भर वो कहलाएगी 

 

अपने अस्तित्व को बचाने की खातिर 

रणभूमि में आकर वह रण चण्डी बन जाएगी 

आज की नारी स्वयं को दे सकती है एक नई पहचान 

देखते ही देखते वो तो कामयाबी का आसमान छू जायेगी 

एक दिन पंख लगाकर दूर कहीं आसमान में उड़ जायेगी नारी 

 

ममता है तो कभी समर्पण है नारी 

हर जिम्मेदारी बखूबी निभाती है नारी

अब ये नारी ना तो अबला और ना ही बेचारी

कुछ नया कर गुजरने की नई अभिलाषा है नारी  

हर कठिन मंजिल का अब डटकर करेगी ये सामना 

और एक दिन जीवन में बहुत ही आगे बढ़ जायेगी ये नारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract