STORYMIRROR

Harsh Singh

Inspirational

3  

Harsh Singh

Inspirational

नारी तुम हो जटिल प्राणी

नारी तुम हो जटिल प्राणी

1 min
384

नारी तुम हो जटिल प्राणी करती क्यों नहीं तुम अपनी मनमानी 

समझे ना कोई तुम्हारी वाणी समेट रही तुम अम्बर का पानी

नारी तुम हो जटिल प्राणी 

कहीं दिया बुझाकर कहीं नींद जगाकर उजागर करती तुम नयी क्रांति 

दुष्प्रचार पे अंकुश करके दूर करती तुम सबकी भ्रान्ति 

नारी तुम हो जटिल प्राणी 

दिल पे अपने पत्थर रखके भगत जैसा पुत्र दिया 

रानी लक्ष्मी का स्वरुप लेकर गुलामी के बेड़ियों से मुक्त किया 

तुमको समझ पाना मुमकिन ही नहीं तुमसे समझ की परिभाषा बनी 

नारी तुम हो जटिल प्राणी 

कभी माँ की ममता लेकर कभी प्रेमी की प्रेमिका बनकर तुम्हारी जवाबदेही रही 

शांति के लिए अत्याचार को सहना तुम्हारी सबसे बड़ी भूल रही 

तुम्हारे निष्कपट निष्कलंक मन से सदा विश्व का कल्याण हुआ 

पुरुषों से तुम्हे कम समझने से सदैव विश्व की हानि हुई 

नारी तुम हो जटिल प्राणी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational