Kiran Bala
Abstract
पल-पल टूटे, हर पल बिखरे
खाए ठोकर,उफ्फ न निकले
नाजुक-सा नादान ये दिल
बेचारा- सा हैरान ये दिल
खुशियाँ पा जाता है खिल
भुला द्वेष जाता घुल-मिल
उम्र के संग प्रतिक्षण निखरे
रहे नादान,ये कभी न बदले।
उन्हें प्रणाम...
किसान
किताबें
"उम्मीद का रं...
'मैं आजाद हूँ...
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माँ मुझको एक ...
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मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना जाता है मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना...
राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं, राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं,
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
दीवाली मनाकर सो गया, न सुन सका दीये का क्रंदन। दीवाली मनाकर सो गया, न सुन सका दीये का क्रंदन।
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
पर तुम्हें पढ़ना ही नहीं समझना भी मुझे लगता है पहाड़। पर तुम्हें पढ़ना ही नहीं समझना भी मुझे लगता है पहाड़।
याद है तुम्हें जब पहली बार मिले थे हम दोनों, क्या मुलाकात थी हमारी याद है तुम्हें जब पहली बार मिले थे हम दोनों, क्या मुलाकात थी हमारी
होती कोई जो कभी लाड़ लड़ाती तो कभी लड़ती मुझसे होती कोई जो कभी लाड़ लड़ाती तो कभी लड़ती मुझसे
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
तुम मुझे कुछ वादे दे दो, बदले में कुछ यादें ले लो, तुम मुझे कुछ वादे दे दो, बदले में कुछ यादें ले लो,
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
बन्धन सब हैं कच्चे जग झूठी माया राधे कृष्णा सच्चे बन्धन सब हैं कच्चे जग झूठी माया राधे कृष्णा सच्चे
इसलिए हम उन चीज़ों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जो सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, इसलिए हम उन चीज़ों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जो सबसे ज्यादा मायने रखती हैं,
जिद करके मांगे पूरी करवानी थी, बचपन की भी अजब कहानी थी। जिद करके मांगे पूरी करवानी थी, बचपन की भी अजब कहानी थी।
जानकी मंगल पार्वती मंगल दोहावली आदि ग्रंथ जानकी मंगल पार्वती मंगल दोहावली आदि ग्रंथ
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
घर - घर के आंगन में आज रंगोली बनी है दीपक की लड़ियों से अयोध्या आज सजी है घर - घर के आंगन में आज रंगोली बनी है दीपक की लड़ियों से अयोध्या आज सजी है
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
न खुद धर्मभ्रष्ट हुईं और न ही बेटे को गुमराह किया, न खुद धर्मभ्रष्ट हुईं और न ही बेटे को गुमराह किया,