मुरझाई जिंदगी
मुरझाई जिंदगी
मुरझाई जिंदगी को खिलने के लिये एक मुस्कान चाहिये
गम में डूबे को बाहर निकलने के लिये एक हाथ चाहिये,
फिर तो एक तिनका भी साखी फौलाद बन जायेगा
गिरते हुए को उठानेवाला बस एक कर्ण सा मित्र चाहिये,
आवाज गूंजेगी हर महफ़िल में ऐसी एक दहाड़ चाहिए
मुरझाई जिंदगी को खिलने के लिये एक मुस्कान चाहिए,
हर शूल,फूल बनने लगेगा,हर ठोकर गुरु बनने लगेगा
बस किसी एक शूल का हृदय पर एक आघात चाहिये,
जग में उज्ज्वल भी तू है,जग में साखी धूमिल भी तू है
बस रोशनी के लिये खुद में सूरज सी एक गर्मी चाहिये,
मुरझाई जिंदगी को हंसने के लिये एक मुस्कान चाहिये
टूटकर संभलने के लिये ख़ुद में ख़ुदी का एक सहारा चाहिए,
तेरे मन का रेगिस्तान हरभरा बन जायेगा एकदिन,बस
पतझड़ को हंसने के लिये सावन की एक फुंहार चाहिये,
मुरझाई जिंदगी को खिलने के लिए एक मुस्कान चाहिए!
