डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Abstract
शब्द अचानक रूठ गए हैं,
सुनकर भावों का क्रंदन
सजी कामिनी कविता का अब,
कौन उठाए अवगुंठन।
आक्रांतासी घेरे बैठी,
पीड़ा मन के द्वारे पर,
विह्वलता अनुनादित होती,
विरमित लगता है स्पंदन।
बाल कुंडलिया
गीतिका
गीतिका (ज़िंद...
बता तो दे!
लिपट तिरंगे म...
सरस्वती वंदना
भारत का संविध...
सरस्वती वंदन...
कहमुकरी
आज शाम रामलीला मैदान में रावण का पुतला दहन के लिए खड़ा था। आज शाम रामलीला मैदान में रावण का पुतला दहन के लिए खड़ा था।
मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना जाता है मेहंदी का रंग जितना देर तक बरकरार रहता है, नये जोड़ों के लिए यह उतना ही शुभ माना...
उस सपने को जीने का, उस काम को करने का, जो आपके दिल में बसता था। उस सपने को जीने का, उस काम को करने का, जो आपके दिल में बसता था।
मैं जाऊंगा ही जाऊंगा । ए जाते हुए दिसंबर! जरा ठहरो !जरा ठहरो! मैं जाऊंगा ही जाऊंगा । ए जाते हुए दिसंबर! जरा ठहरो !जरा ठहरो!
फलों का तो राजा कहलाता है,आम गर्मी का कर देता है,यह काम तमाम। फलों का तो राजा कहलाता है,आम गर्मी का कर देता है,यह काम तमाम।
सुख समृद्धि शांति सब तुझसे मांँ, तेरे चरणों में हम तू ही सहारा।। सुख समृद्धि शांति सब तुझसे मांँ, तेरे चरणों में हम तू ही सहारा।।
राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं, राम की शरण में आने के चोर रास्ते तलाशने लगे हैं,
जिंदगी से जिंदगी के जंग लिख रहा हूं कभी खुशियां तो कभी गम लिख रहा हूं। जिंदगी से जिंदगी के जंग लिख रहा हूं कभी खुशियां तो कभी गम लिख रहा हूं।
दुखों से निकलने की भरपूर प्रयास लगाया इस जीवन में बहुत कुछ खोया और पाया। दुखों से निकलने की भरपूर प्रयास लगाया इस जीवन में बहुत कुछ खोया और पाया।
फिर भी आज तक मुझे हर साल जलाया जा रहा है मेरा खूब उपहास उड़ाया जा रहा है फिर भी आज तक मुझे हर साल जलाया जा रहा है मेरा खूब उपहास उड़ाया जा रहा है
जादूटोना, टोटके, काला जादू और धार्मिक कर्मकांड, जादूटोना, टोटके, काला जादू और धार्मिक कर्मकांड,
प्रभु! सचमुच आप कुछ देना चाहते हैं तो एक दिन के लिए अपने सारे अधिकार दे दीजिए। प्रभु! सचमुच आप कुछ देना चाहते हैं तो एक दिन के लिए अपने सारे अधिकार दे दीजिए...
अब तो हम आपको अपमानित उपेक्षित नहीं करते अब तो हम आपको अपमानित उपेक्षित नहीं करते
हाँ जल रहा हूँ मैं खुद को ही अब बदल रहा हूँ मैं... हाँ जल रहा हूँ मैं खुद को ही अब बदल रहा हूँ मैं...
सुबह सुबह कोयल की पंछियों की चहचहाना जीने की चाह और सुबह की लाली में खो जाना सुबह सुबह कोयल की पंछियों की चहचहाना जीने की चाह और सुबह की लाली में खो जाना
मेरे सत पर प्रश्न खड़ा कर रहे , क्या खुद सत के नियमों को मानते हो ? मेरे सत पर प्रश्न खड़ा कर रहे , क्या खुद सत के नियमों को मानते हो ?
हमें रामायण और महाभारत की सभी बातें अवास्तविक और मिथक लगती हैं। हमें रामायण और महाभारत की सभी बातें अवास्तविक और मिथक लगती हैं।
उनके अंत:करण के परिवर्तन की दिशा का रुख तक कनक प्रभा जी ने मोड़ दिया। उनके अंत:करण के परिवर्तन की दिशा का रुख तक कनक प्रभा जी ने मोड़ दिया।
अब इतना भी बेचैन न हो जाया करो, अपना महत्व खुद ही न घटाया करो अब इतना भी बेचैन न हो जाया करो, अपना महत्व खुद ही न घटाया करो
सोच तेरी यह भौतिकवाद की इक दिन तुझे खाक में मिलाएगी। सोच तेरी यह भौतिकवाद की इक दिन तुझे खाक में मिलाएगी।