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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

मुक्तक : तेरा आंचल

मुक्तक : तेरा आंचल

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मुक्तक :

 तेरी सांसों की महक से तरोताजा रहता हूं
 दिल दुनिया के भंवर में तनाजा रहता हूं
 अब मुझे चांद सूरज से कोई सरोकार नहीं
 तेरे चेहरे की रोशनी से लिहाजा रहता हूं

 तुम्हारी पलकों की चिलमन का ये इशारा है
 मानो या ना मानो तुम्हारा दिल अब हमारा है
 जेठ की दुपहरी सी लगती हैं अब ये दूरियां
 अब तो तुम्हारा आंचल ही सहारा हमारा है

 श्री हरि
 30.5.25 


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