STORYMIRROR

Ms. Nikita

Inspirational

4  

Ms. Nikita

Inspirational

मुझे बचाओ..

मुझे बचाओ..

1 min
539

मैंने समय दिया

मानव ने नष्ट किया

मैंने प्रेम दिया

मानव ने तिरस्कार किया


मैंने उर्जा दी

मानव ने दहन किया

मैंने इच्छा दी

मानव ने लोभ किया


मैंने सृष्टि संवारी

मानव ने उद्दंड किया

मैंने राह दिखाई

मानव पथभ्रष्ट हुुआ


मैंने परिणाम दिया

मानव ने उपहास किया

मैंने उत्तर दिया

मानव ने ग़ुलाम किया


मैंने बचाया

मानव ने क्षय किया

मैंने अनंत विनती की

मानव ने कृपा न की

अब समय ने पलटा खाया है


मानव स्वयं रोता आया है

मानव को मैंने रूलाया है

तब उसको समझ में आया है

उसने मुझे बचाया है


अब मैंने उक्ति लगाई है

स्वयं के साथ ही

मानव को भी सीख सिखलाई है

मानव के उपहास का 

यहीं स्पष्ट उत्तर है


उसकी करतूतों के कारण

सबके मुख पर बंधन आया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational