STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

4  

Surendra kumar singh

Abstract

मुद्दत बाद

मुद्दत बाद

1 min
444

अंततः वो आदमी मिला

मुद्दत से जिसकी तलाश थी

उसके मिलने भर से

सकून है

खुशी है

आनन्द है

उमंग है

सच पूछिए तो जीने का

मजा मिल रहा है।

आजकल उससे हमारी 

बातें हो रही हैं

खूब हो रही हैं

तरह तरह की।

दिलचस्प बात तो ये है

कि उसकी बातें कहीं और नहीं हैं।

जब कि इन्हें हर जगह होना चाहिये

आखिर मुद्दत बाद आदमी मिला है

और उसकी बातें हैं।

भई

आदमी है

सपना नहीं है

पर जाने क्यों लोगों को

सपना सा लगता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract