मत कर परवाह
मत कर परवाह
मत कर तू परवाह बिल्कुल इस ज़माने की
लोगो की तो आदत है,टांग खींच जाने की
तू वो कर जो कुछ भी तुझे अच्छा लगता है,
सबकी आदत है,यहां अहसान भूल जाने की
इस ज़माने में तू कुछ कर गुजर जा ऐसा,
लोग कहे नही कभी भी तुझे ऐसा-वैसा,
आदत डाल ले,तू हर गम में मुस्कुराने की
मत कर तू परवाह बिल्कुल इस ज़माने की.
अपने रस्ते चल जिंदगी बना सोलह आने की
यहां लोगो से मन लगाना अब छोड़ भी दे,
सब कोशिश में लगे है,बस तुझे गिराने की
लक्ष्य पर नजर रख,किसी से उम्मीद न रख
कोई ज़हमत न करेगा आंसू पूंछ जाने की
अपना किया हुआ कर्म ही तेरे काम आयेगा,
तू कोशिश करता रह फलक में उड़ जाने की
मत कर तू परवाह बिल्कुल इस ज़माने की.
अपनी रोशनी से ही होगा,तेरा नया सवेरा,
बस जरूरत है,तुझे भीतर दीप जलाने की
शत्रु तेरा,भीतर का अधिक खतरनाक है,
जरूरत है,बस भीतरी शत्रु मार गिराने की
कोई कुछ भी कहे,तू बस अपनी धुन में रहे,
तुझे जरूरत है,भीतर शीशे में देख जाने की
मत कर तू परवाह बिल्कुल इस ज़माने की
.
तुझे जाना गर नभ में भूल तू बाते ज़माने की
अपने पर रख नजर,दूसरों के मत कतर पर,
कोशिश कर दूजो की कमियां तू भूल जाने की
अपने बनाये हुए रास्ते पर चलने से ही,
मिलेगी कोई मंजिल,तुझे अपने ज़माने की.
