STORYMIRROR

Kumar Kishan

Abstract

4  

Kumar Kishan

Abstract

मत बनो कठपुतली

मत बनो कठपुतली

1 min
436

यह जीवन तुम्हारा है

इस पर तुम्हारा अधिकार है

हर सुख-दुःख इससे जुड़ा है

तो क्यों बने हो कठपुतली?


हाँ, मत बनो कठपुतली

जीवन में अगर कुछ करना चाहते हो

औरो के लिए प्रेरणा बनना चाहते हो

तो क्यों दूसरों पर निर्भर हो


इस सवाल का जवाब भी दो

क्यों बने हो कठपुतली ?

हाँ, मत बनो कठपुतली


अब जमाना बदल चुका हैं

प्रतियोगिता का दौर आ चुका है

हर जगह काबिलियत पैर जमा रही है

तो तुम कब तक नाकामयाब बन कर रहोगे ?


फिर भी, क्यों बने हो कठपुतली ?

हाँ, मत बनो कठपुतली

अब दिखाओ अपनी आत्मसम्मान

ठुकराओ कठपुतलियों का सम्मान

कठपुतली बनकर नहीं पाओगे मान


यही है इस जीवन का ज्ञान

तो क्यों बने हो कठपुतली ?

हाँ, मत बनो कठपुतली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract