STORYMIRROR

Diwa Shanker Saraswat

Inspirational

4  

Diwa Shanker Saraswat

Inspirational

मर्यादा

मर्यादा

1 min
950

कंपित होते तार वीणा के

रचते संगीत प्रियकर्ण

मर्यादाहीन कंपन कब

संगीत बनाता है

टूट जाते तार वाद्य के 


सुरसरि छिपी कमंडल देव बृह्म के 

भुला मर्यादा बढती भू और 

चहुंओर हाहाकार मचा 

प्रयत्न भगीरथ का व्यर्थ रहता 

पाठ न पढाते शिव सुरसरि को 

कमंडल से निकल समा गयी शिव केश में


गृहत्यागी, बोध की चाह रखे

सिद्धार्थ न पा सके वह ज्ञान 

प्रयत्नों की मर्यादा मान 

बुद्ध बने कर खीर पान 


भलाई की अति 

श्री राम रहे पुकार 

सागर अहं से तृप्त 

मर्यादा उदारता की भी 

लख श्री राम शर 

आ पहुंचा कर जोड़ सागर 


उत्थान, स्वावलंबन, आजादी

विकास, धर्म, कर्मकांड 

नीति, विज्ञान, कर्म 

अध्यात्म या जीवन 

नर हो या नारी

बाल, युवा, बुजुर्ग 

पिता और सुत 

सुता या पुत्रवधू 

मर्यादा है अपरिहार्य।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational