STORYMIRROR

Madhukar Bilge

Abstract

3  

Madhukar Bilge

Abstract

मोहब्बत

मोहब्बत

1 min
185

दिल को किसी की आस नहीं है

आँखोँ में किसी की की प्यास नहीं है।


ए दौर है तन्हाइयों का दौर,

खुद के सिवा कोई साथ नहीं है।


अपनो ने ही मुझे बर्बाद कर दिया

गैरों का इसमे कोई हाथ नहीं है।


सारे ग़मों को सुलाकर सो जाऊँ

नसीब में वो सुकूँ की रात नहीं है।


गलती मेरी थी जो मैंने प्यार किया

खैर अब किसी से शिकायत नहीं है।


कोई तुझे चाहे कोई तुझे भी प्यार करे

'बिलगे' शायद तुझमे वो बात नहीं है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract