STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

3  

Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

मंथरा मर्द

मंथरा मर्द

1 min
186

कुछ प्रगतिशील मर्दों को 

अपनी पत्नियां,

दूसरे घर ब्याही बहने,

महिला मित्र ,

'बेगार करती मजदूर'

नजर आती हैं।


उन्हें,

उन्ही घरों में 

सारा जीवन परिवार में

खपा कर भी

अपमानित, उपेक्षित

अपने रिश्ते का सम्मान चाहती

एक बूढ़ी औरत 

नहीं दिखती।


ऐसे मर्द

मेरी नजर में  

अंदर से मंथरा

होते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract