STORYMIRROR

Supriya Devkar

Inspirational

4  

Supriya Devkar

Inspirational

मंजिल

मंजिल

1 min
20

कितनी दूर है तेरी मंजिल 

रास्ता बडा लंबा है


चलता जा ए मुसाफिर 

राह मे मिलो का खंबा है


अकेला है तो क्या गम रे 

सफर की सुंदरता जान ले


इन वादियो में गुंजता संगीत 

आनंद उसका उठा ले


राहें बदल सी जायेगी 

नये मोड़ मिल जायेंगे


मंजिल मिलने तक 

नये राहगीर मिल जायेंगे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational