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Anuja Singh

Abstract Inspirational

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Anuja Singh

Abstract Inspirational

मंज़िल

मंज़िल

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मैं उन रास्तों से गुजर कर

पहुंचा हूं मंज़िल पर 

जहां हर मोड़ पर धोखा

और रुसवाई है

मैं जीता हूं हर हार से क्यूंकि

ये मेरी खुद से ही लड़ाई है

ना मैने किसी को अपना कहा

ना दुनिया के झूठे भ्रम लिए

जिससे मिला खुल के मिला

अपने दिल के ना किसी को भेद दिए

झूठो की दुनिया में झूठा बना

लोगो के जैसे रूप लिए

आज अच्छा भी हूं, सच्चा भी

और हो गया मशहूर भी

बस थोड़ा ख़ुदग़र्ज़ हुआ

हो गए खुद से थोड़े और फासले

हो गया थोड़ा मजबूर भी

    


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