STORYMIRROR

Mitali More

Abstract

3  

Mitali More

Abstract

मन नहीं हैं मेरा

मन नहीं हैं मेरा

1 min
182

जी लू जरा सा,मन नहीं हैं मेरा 

मर जाऊं यूँ ही,मन नहीं हैं मेरा 


सारे घर को अकेले संभाला हैं मैंने

खुद को संभालू,मन नहीं हैं मेरा


आँखो से मोतीयों की नदीयाँ बह रहीं हैं

थोडी बूंदे उठा लूं,मन नहीं हैं मेरा


जोकर बन हसांता रहा मैं सभी को

अपना दिल बहला लूं,मन नहीं हैं मेरा


जिद को जुनूं,चलती साँसो को सुकूँ बना लूं

जिंदगी जी भर के जी लू,मन नहीं हैं मेरा


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract