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ritesh deo

Inspirational

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ritesh deo

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मन की शांति

मन की शांति

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एक प्रौढ व्यक्ति किसी बुजुर्ग से बाते कर रहे थे- "मै जब युवा था तब जीवन मे मुझे क्या पाना है, उसके सपने देखता रहता था! एक दिन मैने उन चीजो की सूची बनाई, जिन्हे पाकर किसी को भी पूर्णता की अनुभुति हो जाये और वह स्वयं को धन्य समझे! उस सूची मे स्वास्थय, सौंदर्य, समृद्धि, सुयश, शक्ति, सँबल... और भी बहुत- कुछ उसमे मैने लिख दिये!"


उस सूची को लेकर मै एक महात्मा के पास गया और उनसे मैने पूछा कि क्या इस सूची मे मनुष्य की सभी गुणवान उपलब्धियाँ नही आ जाती? मेरे प्रश्न को सुनकर और मेरी सूची मे वरणीत उपलब्धियो को देखकर उन महात्मा के चेहरे पर मुस्कान फैल गयी और वे बोले- "बेटे, तुमने वाकई बहुत अच्छी सूची बनाई है! इसमे तुमने अपनी समझ के अनुसार हर सुंदर विचार को स्थान दिया है! लेकिन तुम इसमे सबसे महत्वपूर्ण तत्व तो लिखना ही भूल गए, जिसकी अनुपस्थिति मे शेष सब कुछ व्यर्थ हो जाता है! उस परम तत्व का दर्शन मात्र विचार से नही, अनुभुति से ही किया जा सकता है!"


मै असमंजस मे आ गया! मेरी दृष्टि मे तो मैने सूची मे एसी कोई चीज नही छोडी थी! मैने उनसे पूछा कि वह तत्व क्या है? इस प्रश्न के उतर मे उन महात्मा ने मेरी पूरी सूची को बडी निर्मलता से काट दिया और उसके सबसे नीचे उन्होने छोटे से तीन शब्द लिख दिए- 'मन की शांति!'


इसी विषय मे सहजोबाई कहती है-

त्रिषणावंत जग मे दु:खी आठो पहर कंगाल!

जिन पाया संतोष धन ते जन माला माल!!


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