STORYMIRROR

Nirupama Mishra

Inspirational

4  

Nirupama Mishra

Inspirational

मन की पीड़ा झुठलाई

मन की पीड़ा झुठलाई

1 min
651

दिवंगत आदरणीय पिता जी को अश्रुपूरित श्रृद्धांजलि 🙏

मोहक सरल छवि आपकी सागर सी गहराई।

व्यक्तित्व गगन के जैसा धरती सम करुणा पाई।


साहस का पर्याय आप थे संघर्षों से भरा था जीवन,

ममता की मूरत थे हरदम निर्मल निश्छल था अंतर्मन,

मधुर बोल की औषधि से मन की पीड़ा झुठलाई।


पथ प्रदर्शक आशा ज्योति जीवन भर ही कर्म रहा,

सुख दुख में समदर्शी थे परोपकारी मर्म रहा,

जीवन अनमोल धरोहर बात हमेशा सिखलाई।


सखा पिता बेटा भाई हर रूप अनूप आपके,

सदगुणों के महासागर उत्तम इंसान आप थे,

धन्य भाग्य मेरे मै जो सुता आपकी कहलाई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational