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Seema Singhal

Abstract

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Seema Singhal

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मन का गणित !

मन का गणित !

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कितनी परिक्रमाएँ

करेगा मन तुम्हारी

कैसे कहूँ 


मुश्किल ही नहीं 

असम्भव है समझना

मन का गणित 


ये चाहे तो 

एक और एक को दो कहे

चाहे तो ग्यारह बताये !


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