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कुमार संदीप

Inspirational

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कुमार संदीप

Inspirational

मजबूर मजदूर

मजबूर मजदूर

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तन तपाता है एक मजदूर कड़कती धूप में

कपकपाती ठंड में भी करता है हर काम

नहीं करता है किसी भी दिन वह आराम


मुन्ना की पढ़ाई और मुनिया की शादी की

चिंता सताती है उस मजदूर को हर पल

काश ! हो किसी दिन ऐसी सुबह कि

दूर हो जाए उनके जीवन से हर दुःख।


आलिशान भवन के निर्माण में है 

एक मजदूर का अतुलनीय योगदान

पर उसकी रात कटती है ख़ुले आसमां के नीचे

सहन करता है माँ धरती की तरह असहनीय कष्ट


चाहत रहती है उसकी भी पाने की बहुत कुछ

पर मजबूर है हर एक मजदूर जीवन से

प्रभु से है प्रार्थना दूर हो जाए हर मजदूर के जीवन से दुःख।


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