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Sachin Brahmvanshi

Abstract Romance Fantasy

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Sachin Brahmvanshi

Abstract Romance Fantasy

ज़िन्दगी मझधार है !

ज़िन्दगी मझधार है !

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ज़िन्दगी मझधार है,

हम फ़िर भी जीए जा रहे हैं।

महज़ तेरी याद से,

ग़म-दर्द सीए जा रहे हैं।

ज़िन्दगी मझधार है !


तुम्हें मुसर्रत हो मुबारक,

जफ़ा की सौगात में।

हम तो समंदर पीर का,

मयकदों में पीए जा रहे हैं।

ज़िन्दगी मझधार है !


अकसर अदा ही बेवफाई,

होती मुक़ाम-ए-इश्क़ पर।

फिर भी नग़मे प्यार के,

महफ़िलों में गाए जा रहे हैं।

ज़िन्दगी मझधार है !


चोट खाई है मुसलसल,

की जो तुमसे माशूकी ।

फिर क्यूँ मुकम्मल इश्क़ का,

राह चलते हर किसी को

इल्म दिए जा रहे हैं ?

ज़िन्दगी मझधार है !


तुम-सा कोई न हो सका,

तुम-सा कभी न हो कोई।

इस पार जो न हो मिलन,

उस पार मिलने की रज़ा

हर बार किए जा रहे हैं।

ज़िन्दगी मझधार है !


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