रक्षाबंधन
रक्षाबंधन
बहन-भाई की प्रीति है,
यह चली आ रही रीति है
है अनुरागी यह सलोना बंधन,
लो पधारा पर्व ‘रक्षाबंधन'।
त्योहार यह ठहरा प्रतीक-ए-अमन,
पवित्र ‘श्रावण' माह होता आगमन
सर्वत्र परस्पर तिलक-चंदन,
जिसे दर्शाए ‘रक्षाबंधन'।
डोर यों तो कच्चे धागे का,
सुरक्षा-चिह्न आयुष्यभर का
विनोदमय हुए सभी के मन,
आया खुशनुमा ‘रक्षाबंधन'।
इस रिश्ते का इतना मान,
खींच लाए यमलोक से प्राण
नाता है नाजूक कलियों-सा,
जिसे खिलाए ‘रक्षाबंधन'।
एक उदाहरण गोविंद-द्रोपदी,
जिनकी मिसाल रही सदियों-सदी
बहन करे भाई का वंदन,
एकत्र मनाएँ ‘रक्षाबंधन'।
