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Sachin Brahmvanshi

Abstract

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Sachin Brahmvanshi

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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

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बहन-भाई की प्रीति है, 

यह चली आ रही रीति है

है अनुरागी यह सलोना बंधन, 

लो पधारा पर्व ‘रक्षाबंधन'। 


त्योहार यह ठहरा प्रतीक-ए-अमन, 

पवित्र ‘श्रावण' माह होता आगमन

सर्वत्र परस्पर तिलक-चंदन, 

जिसे दर्शाए ‘रक्षाबंधन'। 


डोर यों तो कच्चे धागे का, 

सुरक्षा-चिह्न आयुष्यभर का

विनोदमय हुए सभी के मन, 

आया खुशनुमा ‘रक्षाबंधन'। 


इस रिश्ते का इतना मान, 

खींच लाए यमलोक से प्राण

नाता है नाजूक कलियों-सा, 

जिसे खिलाए ‘रक्षाबंधन'। 


एक उदाहरण गोविंद-द्रोपदी, 

जिनकी मिसाल रही सदियों-सदी

बहन करे भाई का वंदन, 

एकत्र मनाएँ ‘रक्षाबंधन'।


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