महफूज रहे देश हमारा
महफूज रहे देश हमारा
आज महफूज़ है जिन हाथों में यह देश हमारा:
अविश्मरणीय है उनका शौर्य व उनका सहारा!
अपनी मातृभूमि से करते जो स्नेह सबसे पहले:
देशप्रेम से बढ़कर कभी कुछ नहीं उनके लिए!
देश ध्वज़ लेकर निकला माटी का तिलक किया:
देशप्रेम से रंगे कुमकुम से माँ ने अभिषेक किया!
कितने तूफां कितनी आंधी राहों में आती जाती है:
जोश जज्बा व हिम्मत आगे नतमस्तक हो जाती है!
केसरिया बाना दमके ओज भरी हुंकार सैनिक की:
शांति व अमन के मोती गूंथकर बनी माला उनकी !
शौर्य व पराक्रम ओज भर रग रग में जोश जगाते हैं :
शांति प्रेम की इस मिट्टी को सब नित्य शीश नवाते हैं!
