Deepa Dingolia
Drama
ज़िन्दगी मेरी कितनी
बदरंग हुई
वजह से तेरी
आ
आज
सब कुछ
नजरे-अंदाज कर दूँ
सिर्फ, दोस्त ही
शामिल हों
महफ़िल में मेरी
ये भी
मुमकिन नहीं
तो ले
आज तुझे ही
मैं महफिले-खास
कर दूँ।
* उम्मीद *
तब्दीली
महफिले-खास
शामिल
झलक
मौसम की मार
आहट सी है
हकीकत
मोहब्बत
मुलाकात
मेरे साथ में दूसरे बढे़ सदा परोपकार की भावना ह्रदय रही।। मेरे साथ में दूसरे बढे़ सदा परोपकार की भावना ह्रदय रही।।
क्रांति रास्ता भटक गई है- इसीलिए विद्रोह, बगावत हो गया है, लोगों में क्रांति रास्ता भटक गई है- इसीलिए विद्रोह, बगावत हो गया है, लोगों में
न दुआ, आर्शीवाद की तुम्हे जरूरत जो नियत तुम्हारी साफ रही।। न दुआ, आर्शीवाद की तुम्हे जरूरत जो नियत तुम्हारी साफ रही।।
उसकी तारीफ की चाहत में, राज़ अब कितने लिख डाले उसकी तारीफ की चाहत में, राज़ अब कितने लिख डाले
सबको संग में जो लेकर चलता ऐसी, उसके संग ही घटना हो।। सबको संग में जो लेकर चलता ऐसी, उसके संग ही घटना हो।।
खुशियाँ लौटाने सुने घरों में राखी के बहाने आई है। खुशियाँ लौटाने सुने घरों में राखी के बहाने आई है।
गर हमें एक रहना हमारा संविधान भी सिखाता हैं, एकता में जो ताक़त हैं वो दुनियाँ में क गर हमें एक रहना हमारा संविधान भी सिखाता हैं, एकता में जो ताक़त हैं वो...
वरना दुनिया के बाज़ार में, रिश्तों की मंदी है।। वरना दुनिया के बाज़ार में, रिश्तों की मंदी है।।
जीवन-मरण के बीच का जीवन, उसके बाद है चिर आराम। जीवन-मरण के बीच का जीवन, उसके बाद है चिर आराम।
जीवन में कभी समझ सके न ऐसा मीठा वार करेगा जीवन में कभी समझ सके न ऐसा मीठा वार करेगा
उम्र बडी़ नही, बडी़ जिंदगी चाहिए नया परिवर्तन लाती सोच जो ले।। उम्र बडी़ नही, बडी़ जिंदगी चाहिए नया परिवर्तन लाती सोच जो ले।।
शक्ति उत्पत्ति का आधार है, सरस्वती से मिलता समस्त ज्ञान। शक्ति उत्पत्ति का आधार है, सरस्वती से मिलता समस्त ज्ञान।
बडे़-बडे़ लछ्य छोटे पड़ते ऐसी एकता की ताकत बेजोड़। बडे़-बडे़ लछ्य छोटे पड़ते ऐसी एकता की ताकत बेजोड़।
धर्म-कर्म में होती वृद्धि तब खुश हो जाते देवता सभी धर्म-कर्म में होती वृद्धि तब खुश हो जाते देवता सभी
अधूरे के अधूरे हैं तुझे कितना मैं बतलाऊँ अधूरे के अधूरे हैं तुझे कितना मैं बतलाऊँ
तुम रोना मत मुझसे वादो करो जरा वक्त मुश्किल है हिम्मत भरो। तुम रोना मत मुझसे वादो करो जरा वक्त मुश्किल है हिम्मत भरो।
चलो आज एक प्रण करें, यादों में ही नहीं, कर्म से आज़ादी के मतवालों को नमन करें। चलो आज एक प्रण करें, यादों में ही नहीं, कर्म से आज़ादी के मतवालों को नमन करे...
कान्हा जी, तू अब तो आजा, मेरी जिंदगी में। कान्हा जी, तू अब तो आजा, मेरी जिंदगी में।
जुदाई की आग को आँसुओं से बुझाएँ बैठे हैं। जुदाई की आग को आँसुओं से बुझाएँ बैठे हैं।
खुद मैं जज्ब किये थे जो सपने पंकज, उन सपनों को कभी खोल कर नहीं देखा। खुद मैं जज्ब किये थे जो सपने पंकज, उन सपनों को कभी खोल कर नहीं देखा।