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Tamanna Angels Angels are coming to bless you

Inspirational

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Tamanna Angels Angels are coming to bless you

Inspirational

महकता सपना

महकता सपना

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मैं भी आख़िर फूल बनूँगी

मंद मंद मुसकाऊँगी 

जो भी पास मेरे आएगा 

उसको में महकाऊँगी 


कल देखा था मैंने सपना 

अंबर पर काले बादल थे 

बारिश की निर्मल बूँदें थी 

फूलों की सजी क्यारी थी


एक कुसुम की बेल लगी थी 

मनमोहक सुंदर फूल खिले 

आसमां की तरफ़ निहारे 

धरती पर जैसे इंद्रधनुष मिले


बड़े जतन से तप करते 

कुछ भँवरे भी मुझे दिखे 

वही पास में तितली देखी 

इठला के फूलो पे सजे हुए 


कुछ परिंदे भी मुझे दिखे थे 

नभ पे अजब प्रेम संगीत बजे 

एक म्यूर का जोड़ा भी था 

नृत्य की अद्भुत कला लिए 


सब ख़ुशी से झूम रहे थे 

मिलकर साथ में घूम रहे थे 

बिना क़सम के बिना रस्म के 

बस जीवन के इस पहलू को 

प्रेम भरे मन मंदिर के जैसे 

बिना शर्त के बिना बोझ के 

खुल कर जी भर भोग रहे थे 


इतनी ख़ुशियाँ इतना समर्पण 

बिना कहे हर आस का तर्पण 

ये कैसा संजोग दिखा था 

फूलो सा दिल मेरा खिला था 


एक सोच को मान सही 

मैं फूलो की और बढ़ी 

सोचा ख़ुशियाँ घर ले आऊँ

इन्हें तोड़ कर घर अपना सजाऊँ

जैसे सुंदर रूप है इनका 

सुंदर कोमल इनकी काया है 

इतनी ख़ुशियाँ जो बिखरी है 

इन फूलो की ग़ज़ब हस्ती है 

मेरा घर भी खिल जाएगा 

इनके साथ से प्रेम मिलेगा 

हर कोना फिर मुसकाएगा 

यही सोच को मान सही 

में फूलो की और बढ़ी 


हाथ बढ़ा कर झट से तोड़ा 

लिए ख़ुशी से टूटे फूल 

मैं सब गयी स्वार्थ में भूल 

लेकर इनको झूम रही थी 

इनको ही तो ढूंढ रही थी 

न जाने कब से जीवन मैं

दुःख से विचलित मैं होकर ही 

मन मैं पीड़ा कुण्ठा भरकर 

जीवन रथ को व्याकुलता से 

बड़े जतन से खींच रही थी 

समझ इन्हें दुःख से मुक्ति 

लिए हाथ मैं सुंदर फूल 

मैं पहुँच गयी घर सब कुछ भूल 


पर ये क्या, ये क्या मैंने कर डाला 

इन फूलों की महक छीन ली 

इनके सुंदर अस्तित्व को रौंदा

विस्मित किया इनकी काया को 

ये गुच्छा तो मुरझाया है

बिना चमन के बिना प्रेम के 

बिना कोई अपराध किए भी 

स्वार्थ मेरे से भरमाया है 

हाय ये क्या मैंने कर डाला 

क्यूं न समझा इनके जीवन को 

जीवन इनका देना ख़ुशियाँ 

बिना किसी अनमोल वचन के 

आँख मेरी में पछतावा था 

दिल में बिना शूल भी दर्द छिपा था 

चिंता और अपराध बोध से

मेरा पल पल विचलित बड़ा था 

बस इस छटपटाहट में ही मेरी आँख खुली


देखा इधर उधर घबरा कर 

फिर राहत की साँस भरी

फिर से ख़ुशी से मैं महक पड़ी 

झट से हाथ प्रभु को जोड़े

शुक्र मनाया इस सपने का 

आज असलियत में ये जाना

प्रेम है होता बिना शर्त की पाबंदी के 

त्याग समर्पण इसकी महक है 

लिए उदाहरण पुष्प जीए है 

तभी वचन खुद से कर डाला 

हाँ मैं भी बस फूल बनूँगी

मंद मंद मुसकाऊँगी

जो भी पास मेरे आएगा 

उसको में महकाऊँगी



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