महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा
छायावादी युग की
प्रमुख आधार स्तंभ जो
हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान
कवियित्री कहलाती हैं,
रचनाएँ इनकी हृदय के अनंत में पहुँचकर
बहुत कुछ कह जाती हैं I
आधुनिक मीरा के नाम से जानी जाती
जिनको हिंदी के विशाल मंदिर
की सरस्वती की उपमा दी जाती है
अपनी बात को अपने लेखन से
बड़ी सहजता से कह जाती
छायावादी युग की
प्रमुख आधार स्तंभ कहलाती हैं
बहुमुखी प्रतिभा की धनी
साहित्य जगत का चमकता सितारा थीं
काव्य लेखन के साथ-साथ
संगीत और चित्रकारिता में भी इनकी रूचि थी
बस इतना ही नहीं
कई क्षेत्रों में रहा इनका योगदान
इसलिए कविताओं में भी
इनका हर भाव झलकता था
मन की पीड़ा को
स्नेह और श्रृंगार से संजोया है
काव्य हर पाठक को गहराई तक
प्रभावित कर जाती हैं
खड़ी बोली में हिंदी कविता को
कोमल शब्दावली से सजाया
रचनाएँ इनकी हृदय के अनंत में पहुँचकर
बहुत कुछ कह जाती हैं I
हिंदी साहित्य में ध्रुव तारे की तरह
आप हमेशा प्रकाशमान रहेंगी
मानव प्रेम के साथ-साथ
पशु प्रेम को भी अपने लेखन से सजाया
गौरा,गिल्लू,नीलकंठ , सोना,
सभी कहानियों में पशु प्रेम झलकता है
हर लेख उनका पाठक से
बहुत कुछ कहता है
वेदन की कवयित्री, रहस्यवादी कवियित्री
के नाम से जानी जाती हैंl
पूछता क्यों शेष कितनी रात,
मैं नीर भरी दुख की बदली,
हर पीड़ा को भी अपने लेखन से
और मन के भावों से सजाया
रचनाएँ इनकी हृदय के अनंत में पहुँचकर
बहुत कुछ कह जाती हैं
छायावादी युग की
प्रमुख आधार स्तंभ कहलाती हैं।
