STORYMIRROR

सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Inspirational

4  

सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Inspirational

मेरी तमन्नाएं

मेरी तमन्नाएं

1 min
33

मेरी तमन्नाएं उड़ जाने को कहती हैं,

जग से मुझे लड़ जाने को कहती हैं।


हाथ पर हाथ धरकर बैठने को नहीं,

मुझसे ये कुछ कर जाने को कहती हैं।


तमन्नाएं पूरी कर सकूं बस इसलिए,

ये मुझे यूं अड़ जाने को कहती हैं।


ये मुश्किलो का करके बस अब,

मुझे उन पर चढ़ जाने को कहती हैं।


और जो कुछ न हो पाए मुझसे तो,

ये मुझे सिर्फ मर जाने को कहती हैं।


अगर मैं ग़लत राह पर चल दूं तो,

मुझे वहां से उतर जाने को कहती हैं।


मेरी तमन्नाएं मुझे बस हर समय,

जग से लड़ जाने को कहती हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational