STORYMIRROR

HmBhawana Sharma

Inspirational

4  

HmBhawana Sharma

Inspirational

मेरी साँसें

मेरी साँसें

1 min
261

घुट रही है सांसे मेरी

सुख है चैन कहाँँ से पाऊं।


बना शहर में मेरा घरौंदा

 ताजी हवा कहां से लाऊं


 नन्ही सी गौरैया को मैंने

 आंगन में उड़ते देखा


 कच्ची छत में बना घोंसला

 मैंने आंखों से देखा 


सुंदर-सुंदर पंख सुनहरे

 ढूंढ कहां से मै लाऊँ


प्यारी छोटी सी चिडिय़ा

मैं कहाँ से दिखलाऊँ


आगे बढ़ने की इस धुन में

 इतना आगे आ गये हम


चाँद तक तो पहुँच गये

 चांदनी निर्मल खो गए हम।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational