NIKHIL KUMAR NITYA
Inspirational
मेरी जिन्दगी दर बदर करने बाली
कहाँ है हमसफर कहने बाली
सुना है तेरे तीसरा बच्चा हुआ है
कहाँ है मुझसे दो बच्चो की जिद करने बाली
सनम
मेरे दो पल तु...
एक अधूरी कवित...
उठो बेटियों, नव दुर्गा बन दुष्टों का संहार करो। उठो बेटियों, नव दुर्गा बन दुष्टों का संहार करो।
देवता मेरे माता पिता तुम ही हो। उससे पहले माँ मेरी गुरु बन गई। देवता मेरे माता पिता तुम ही हो। उससे पहले माँ मेरी गुरु बन गई।
अपने शिष्य की उन्नति के लिए कलम कभी तलवार उठाया अपने शिष्य की उन्नति के लिए कलम कभी तलवार उठाया
पर ना कमी आई कभी, एक शिक्षक के वफादारी में! पर ना कमी आई कभी, एक शिक्षक के वफादारी में!
शाला से बाहर जब आया, नई दुनिया में खुद को पाया। शाला से बाहर जब आया, नई दुनिया में खुद को पाया।
मैं एक नारी हूं ना मैं अबला हूं ना मैं लाचार हूं मैं एक नारी हूं ना मैं अबला हूं ना मैं लाचार हूं
धिक्कार है ऐसे बेटों को, जो मां बाप की सेवा,कर ना सके। धिक्कार है ऐसे बेटों को, जो मां बाप की सेवा,कर ना सके।
मर गये लड़ते लड़ते सीमा पर वो, मुंह से निकली भारत माता की जय आखिरी वाणी थी। मर गये लड़ते लड़ते सीमा पर वो, मुंह से निकली भारत माता की जय आखिरी वाणी थी।
किसी की घर की बहू तो किसी के घर की बेटी हूँ हा मैं नारी हूँ! किसी की घर की बहू तो किसी के घर की बेटी हूँ हा मैं नारी हूँ!
बढ़ते कदम हमारे, गुरुवर जीवन संवारे। बढ़ते कदम हमारे, गुरुवर जीवन संवारे।
मान, सम्मान प्रेम मिले तो घर को स्वर्ग बना देती हैं मान, सम्मान प्रेम मिले तो घर को स्वर्ग बना देती हैं
गुरु भी इंसान है कोई पत्थर की मूरत नहीं।। गुरु भी इंसान है कोई पत्थर की मूरत नहीं।।
गुरु की उंगली पकड़ कर चला हर वो इंसान, गुरु की उंगली पकड़ कर चला हर वो इंसान,
शत शत नमन गुरुओं को सभी, और शुक्रिया होने का जीवन में हमारे। शत शत नमन गुरुओं को सभी, और शुक्रिया होने का जीवन में हमारे।
निज प्राण आहूत करके कर्तव्य अपना निभाते, मातृभूमि का बन गौरव मान राष्ट्र का हैं बढ़ाते निज प्राण आहूत करके कर्तव्य अपना निभाते, मातृभूमि का बन गौरव मान राष्ट्र का ह...
रिश्ते सादे थे, कांच से साफ ना कोई छल था ना कोई कपट रिश्ते सादे थे, कांच से साफ ना कोई छल था ना कोई कपट
अंधविश्वास के समंदर को चीर, नवीन तर्क के साहिल तक ले जाता है अंधविश्वास के समंदर को चीर, नवीन तर्क के साहिल तक ले जाता है
हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनों को भूल गई वो है मां..... हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनों को भूल गई वो है मां.....
विषम परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हैं विषम परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हैं
खत्म हुई अब सहन मेरी अब मैं भी आवाज उठाऊंगी! खत्म हुई अब सहन मेरी अब मैं भी आवाज उठाऊंगी!