Neetu Somani
Drama
मेरी कलम मेरी पहचान
मेरा सच मेरा अभिमान
मेरी कलम ने मेरा वक्त बदलते देखा है
मेरी जिंदगी का सूरज ढलते,
और चाँद को संवरते देखा है
इसकी वफा है कि
कुछ लोग जानते है मुझे
वरना हमने तो अपनों को भी
अजनबी बनते देखा है।
मेरी कलम
इस कविता में कवि ने सूर्य और संध्या के रूपक का इस्तेमाल करते हुए जीवन में कुछ विषय पर रोशनी डाली है.... इस कविता में कवि ने सूर्य और संध्या के रूपक का इस्तेमाल करते हुए जीवन में कुछ वि...
उम्मीद से बँधे समंदर है आँखों में, जो बेवक्त बहते नहीं हैं। उम्मीद से बँधे समंदर है आँखों में, जो बेवक्त बहते नहीं हैं।
माँ मैं जब पैदा हुई तुम बहुत खुश हुई तुम्हीं ने मुझे पहला शब्द माँ बोलना सिखाया माँ मैं जब पैदा हुई तुम बहुत खुश हुई तुम्हीं ने मुझे पहला शब्द माँ बोलना सिखाया
जो कभी सांसों में मेरे बसता था खुसबू की तरह ,अब लहू बन के रिसता हैं किसी पुराने ज़ख्म की तरह जो कभी सांसों में मेरे बसता था खुसबू की तरह ,अब लहू बन के रिसता हैं किसी पुराने...
एे राहगीर,फिकर ना कर तपतपाती हुई धूप कीना सोच राह में कुछ अनहोनी होने कीआसमान तो खुला है और राह भी स... एे राहगीर,फिकर ना कर तपतपाती हुई धूप कीना सोच राह में कुछ अनहोनी होने कीआसमान तो...
ढूंढ रहा हूँ अपनी कविताएँ.... ढूंढ रहा हूँ अपनी कविताएँ....
कितनी भीगी आँखे? कितने दिल नरम है! "अम्मा" तेरे जाने का सबको कितना गम है। कितनी भीगी आँखे? कितने दिल नरम है! "अम्मा" तेरे जाने का सबको कितना गम है।
This is poem about life and narrated in very simple words. The wisdom we might have lost in day to d... This is poem about life and narrated in very simple words. The wisdom we might h...
आप उन चीजों की परवाह नहीं कर सकते हैं जिनकी आप वास्तव में परवाह करते हैं, आप उन चीजों की परवाह नहीं कर सकते हैं जिनकी आप वास्तव में परवाह करते हैं,
बंदगी मे बस एक ही दुआ मांगो जिंदगी का बसर चाहे जितना कठिन हो| बंदगी मे बस एक ही दुआ मांगो जिंदगी का बसर चाहे जितना कठिन हो|
रुह? आखिर ये होता/होती क्या है?वही जिसे हम आत्मा के नाम से जानते हैं? या कुछ और?पर सुना है ये तो कुछ... रुह? आखिर ये होता/होती क्या है?वही जिसे हम आत्मा के नाम से जानते हैं? या कुछ और?...
ज़िंदगी कभी छोड़ देती है ऐसी दो-राहों में ... ज़िंदगी कभी छोड़ देती है ऐसी दो-राहों में ...
इंसान को जब नींद नहीं आती तो वह टी वी देखता है , टहलता है, गाने सुनता है लेकिन कवि को जब नींद नहीं आ... इंसान को जब नींद नहीं आती तो वह टी वी देखता है , टहलता है, गाने सुनता है लेकिन क...
कभी कही ना थी वो बात किसी से, जुबां पर वो मंडराती थी फिर दिल में जा बस जाती थी। कभी कही ना थी वो बात किसी से, जुबां पर वो मंडराती थी फिर दिल में जा बस जाती थी।
महलों वाली रानी भी सुने, महलों के राजा भी सुने प्रजा बोल रही है, हमारी भी आवाज़ सुने नींव के पत्थर... महलों वाली रानी भी सुने, महलों के राजा भी सुने प्रजा बोल रही है, हमारी भी आवाज़...
पापा की परी...बेटियाँ पापा की परी...बेटियाँ
सपने देखने को नींद ज़रूरी हैं मगर ,नींद को आने के लिए भी सपने ज़रूरी हैं बहुत सपने देखने को नींद ज़रूरी हैं मगर ,नींद को आने के लिए भी सपने ज़रूरी हैं बहुत
ये कविता सरहद पर बने एक कुँऐ के बारे में है जो दोनों तरफ के विवाद से परेशान है। ये कविता स्वतंत्रता ... ये कविता सरहद पर बने एक कुँऐ के बारे में है जो दोनों तरफ के विवाद से परेशान है। ...
अब वक्त नहीं मेरे आका कैसे मिलेगा अब मौक़ा?मेरी अक्ल का तो निकल चुका है दिवाला?अब तो तू ही है सँभालने... अब वक्त नहीं मेरे आका कैसे मिलेगा अब मौक़ा?मेरी अक्ल का तो निकल चुका है दिवाला?अब...
लतीफ़ा लगता है शहर सारा, एक ग़ुमनाम जोकर, मैं भी तो हूँ... लतीफ़ा लगता है शहर सारा, एक ग़ुमनाम जोकर, मैं भी तो हूँ...