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Anita Sharma

Tragedy

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Anita Sharma

Tragedy

मेरी खुली जुल्फें

मेरी खुली जुल्फें

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हरफन मौला सी मेरी जुल्फें लापरवाही से जब झूमती थीं,

"तुम बहुत लापरवाह हो"चारों तरफ बस 

यही आवाजें गूंजती थीं।

तब मैं सोचती थी सिर्फ अपने बारे में

कुछ भी कर गुजरने की हिम्मत भी रखती थी

तब मुझे किसी बंधन में बांधने की चर्चा चहुं ओर होती थी।

एक दिन ऐसा भी आया सबने मिलकर मेरे अधूरे सपनों 

को तोड़ मुझे गठबंधन का नाम दिया, 

मेरी खुलीं जुल्फों को जिम्मेदारियों के जूड़े में बांध दिया।

आज मैं तमाम मुश्किलों के बावजूद 

अपनी जुल्फों को जूड़े में बांध सारी जिम्मेदारी निभाती हूं,

और खुला छोड़कर उन्हे अपने सपने भी पूरे करती हूं

क्योंकि मेरी जुल्फों की लापरवाहियां ही मुझे

मेरे जीवित होने एहसास करवाती हैं।

एक औरत अपने सपने खुद पूरे कर सकती है

सभी को ये बता पाती हूं।


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