STORYMIRROR

संजय कुमार

Abstract

2  

संजय कुमार

Abstract

मेरी एक पहचान

मेरी एक पहचान

1 min
12

शायरों के अल्फाजों की शान हो तुम

मोहब्बत का शायराना जहां पर गड़ता हो

ऐसे मंजिल और मकान की राह हो तुम 

चाह कर भी जिसे मिटाया न जा सके

ऐसी हस्ती और ऐसी पहचान हो तुम

महफ़िल जहां सजेगी शायरों से

वहां की महफ़िल में अल्फाज तुम्हारे होंगे

दुनिया से ही तो तुम गए हो 

पर शायरों के होठों पर हमेशा आप होंगे!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract