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Brijlala Rohanअन्वेषी

Abstract Children Stories Classics

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Abstract Children Stories Classics

मेरे पास क्या है ?

मेरे पास क्या है ?

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इनके पास, उनके पास

न जाने कितने जन के पास !

सब मिलाकर कहें तो

लोगों के पास सबकुछ है !


किसी के पास शौहरत अपार है !

किसी के पास दौलत की भरमार है !

मगर मेरे पास तो ये सब कुछ है ही नहीं ! 


तो फिर मैंने अपने दिल से

एक दिन अकस्मात् ही पूछ बैठा

कि आखिर मेरे पास क्या महफूज़ है ? 


तो फिर मेरे दिल ने मुझसे कहा

कि तेरे पास वो तीनों चीज मयस्सर है

जो सबको एकसाथ महफूज़ नहीं !


फिर मैं यकीन कर और

अपने अंदर ढूंढ पता किया

कि सचमुच मेरे पास दुनिया की

तीन अहम रत्न है ! 


और वो तीन रत्न है- माँ !

मोहब्बत ! और मित्र !  


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