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Sajal Shrivastava

Abstract

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Sajal Shrivastava

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मेरे ख्वाबों में ( सजल )

मेरे ख्वाबों में ( सजल )

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तू मिला था मुझे कभी कहीं दूर मेरे ख्वाबों में

तुझे मिलके लगा,मिला है तू ज़रूर मेरे ख्वाबों में


सच कहूं, मुझको तुमसे मिलने में डर लगता है 

देखा जब से तेरे अंदर, बड़ा गुरुर मेरे ख्वाबों में


हकीकत में क्या कहते है लोग तुम्हे, नही मालूम

पर तू ही है सबसे ज़्यादा मशहूर मेरे ख्वाबों में


अब खूबसूरत आंखों का राज़ हमसे न छुपाइये

तेरी आँखें चुराती हैं कहीं से नूर, मेरे ख्वाबों में


मुझे अब नींद से मुहब्बत हो चली है, धीरे धीरे

इतना क्यूँ आया करते हो हुज़ूर मेरे ख्वाबों में


ट्रेन की टिकट वापिस कर दी, जो याद आया

कि तेरे साथ लगाये हैं मैंने कई टूर मेरे ख्वाबों में।


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