STORYMIRROR

Sajal Shrivastava

Abstract

4  

Sajal Shrivastava

Abstract

अच्छा लिखने का राज़ तेरी बेवफाई

अच्छा लिखने का राज़ तेरी बेवफाई

1 min
599

अच्छा लिखने के लिए बुरा

अंजाम मांगती है कलम


लिखने ज़रा बैठो तो तुम

जान मांगती है कलम


दिल को जो छू जाएं लिखी बातें तो

इनाम मांगती है कलम


अच्छा लिखने का राज़ तेरी बेवफाई

तेरा एहसान मानती है कलम


मज़हब देखकर चला नही करती

दिवाली में रमज़ान मांगती है कलम


जितना कमाया उतने में खुश हूँ

झूठ है कि.....

पैसे के लिए काम मांगती है कलम


नशा जो चढ़ता मुझे लिखने का

तो पहले जाम मांगती है कलम


यूँ ही दिन तो ढल नहीं जाता

सूरज से शाम मांगती है कलम


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract