मेरे दिल में बसी एक दुनिया
मेरे दिल में बसी एक दुनिया
दिल में कितनी बातें हैं
दिल में कितनी यादें हैं
दिल में कितनी हलचल है
दिल में कितनी
पानी की लहरों सी ही
कल कल है
दिल भी कितना विचित्र है
इसकी दीवार पर लगे हुए
न जाने कितने चित्र
उनमें से कुछ मेरे अपने तो
कुछ पराये
कुछ परिचित कुछ अपरिचित
कुछ दुश्मन तो कुछ मित्र
दिल के दर्पण में दिखता मेरा
चेहरा
दिल के मंदिर में
प्रभु का डेरा
दिल के उपवन में
भांति भांति के फूल
खिले
दिल के एक कमरे में प्रकाश तो
दूसरे में घुप्प अंधेरा
दिल के मोहल्ले से होती हुई
निकलती कोई
एक सुरंग सी पतली गली जो
मेरे वहां से होकर गुजरने पर
पहुंचा देती मुझे चौड़े रास्तों पर
दिल का कोना कोना
प्रेम की पावन खुशबू से
महकता हुआ
मेरी मां
मेरे पिता का रूप
उनके रूप का नूर
हर सूँ बरसता हुआ
मेरे दिल में बसी
एक दुनिया
यह कहने को मेरी पर
प्रभु द्वारा प्रदत एक
अनुपम सौंदर्य से
अलंकृत एक सुरमई झंकार
सा अलौकिक संसार
दिल में मेरे प्रभु बसते
मेरे दिल का
संसार के कण कण से और
इसके पास भी एक संसार से
गहरा रिश्ता।
