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Pinki Khandelwal

Inspirational

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Pinki Khandelwal

Inspirational

मेरा सपना...।

मेरा सपना...।

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जीवन अंधियारे में बीता,

जवानी पैसे कमाने में बीती,

बुढ़ापे में मैंने एक सपना देखा,

जिसके पूरे होने की मात्र कल्पना थी मन में,

और देखो हो गया वो पूरा..मेरा सपना,


कलम और कागच से मैंने बांधा रिश्ता,

जिसने मेरे जख्मों को कम किया,

मन की उलझनों को मिटाया,

गम के अंधियारे से उजियारे में लाया,

मेरे जज्बातों को एक किनारा मिला,

कागज और कलम ने मुझे खुद से मिलाया,

घंटों विचार करता और फिर लिखने बैठ जाता,

न किसी के साथ की जरूरत महसूस हुई,

न किसी के जाने का अफसोस,

क्योंकि मेरी तो कलम और कागज से दोस्ती हुई,

वहीं थे मेरे ग़म और खुशी के साथी मेरे हमदम,


सब कहते बुढ़ापे मे शौक चढ़ा है लिखने का,

और खूब हंसते बस मैं उनकी सुनता था,

और लिखता रहता अपने अरमानों को,

टूटे मेरे हजारों सपनों को,

किन ख्वाहिशों का गला घोंटा था, लिखा मैंने,

और लिखा कैसे बच्चों से मिलने को तरसता था,

पर जब किसी ने साथ नहीं दिया तब कलम थी साथ,

और आज वही मेरा जीवन और वही मेरा सपना है,


और सोचता था मैं,

लिखूं हजारों उन असहाय वृद्ध मां बाप की कहानी,

जिनकी जिंदगी बच्चों के जीवन को संवारने में,

उनको ख्वाहिशों को पूरा करने में चली गयी,

और कैसे वो हमारा प्यार चुटकियों में भुला बैठे,

लिखूं अपने उस दर्द को जब छोड़ गए मुझे अकेला,

लिखूं वो पीड़ा जो बुढ़ापे में हर इंसान भुगतता है,

लिखूं वो मासूमी जो अकेलेपन में महसूस होती है,


सचमुच खुशी तब हुई जब मेरी किताब प्रकाशित हुई,

"बुढ़ापा...जिसका कोई साथी नहीं होता"। 


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