मेरा पैगाम सारी सखियों के नाम
मेरा पैगाम सारी सखियों के नाम
सुनों सखी
तुमसे ही कह रही हूं...
अच्छी लगती हो तुम,
जब तुम उन्मुक्त जीती हो।
चहकती हुई,खिलखिलाती हुई
किसी प्यारी गुड़िया सी लगती हो।
जब तुम अपनें हौसलों को अपनी ढाल बनाती हो,
सच में बहुत खूबसूरत लगती हो।
जब तुम खोखले रीति रिवाजों को ठेंगा दिखाती हो,
वैसे तो हर वक्त गऊ बनी रहती हो,पर जरूरत पड़ने पर शेरनी बन जाती हो,
सच में बहुत खूबसूरत लगती हो,
जब तुम कुछ वक्त एकांत में खुद के साथ बिताती हो,
सच में बहुत खूबसूरत लगती हो।
एक बेटी,बहन,माॅं,दोस्त,पत्नी,बहु,दादी,बुआ,मौसी,मामी ,चाची
सारे किरदारों को कितने करीनें से निभाती हो,
सच में बहुत खूबसूरत लगती हो।
तुम घर की जिम्मेदारियां निभा रही हो,
या कामकाजी हो,
सबको अथाह प्रेम करते हुए,
जब तुम खुद को भी संग में प्रेम करती हो,
बड़ी खूबसूरत लगती हो।
सुनो,
मुझे सच में नहीं पता..कितने लोगो ने तुमसे ये बात कही,
पर मैं कहना चाहती हूॅं तुम बहुत खूबसूरत हो,
और
दुनिया ने तुमको लेकर आज तक जितनी नकारात्मक परिभाषाएं दी,उसे भूल जाओ,मेरा यकीन करो...
तुम हिम्मती,ममतामयी, स्नेहमयी और बेहद खूबसूरत हो।
तुम्हारी सखी।
